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Friday, 27 November 2015

तुर्की की सफाई को रूस ने किया दरकिनार, सीमा पर तैनात किया जंगी बेड़ा!

नई दिल्ली।  पूरी दुनिया आज एक ही सवाल का जवाब जानना चाहती है, क्या रूस बदला लेगा, क्या रूस अपने विमान पर मिसाइल हमले के लिए तुर्की को सबक सिखाएगा? ये सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि रूस ने तुर्की की सीमा के नजदीक अपने लड़ाकू दस्ते को तैनात कर रहा है। तुर्की लगातार सफाई दे रहा है, लेकिन रूस किसी की सुनने को तैयार नहीं है।

क्या दुनिया तीसरे विश्व युद्ध के मुहाने पर खड़ी है, क्या दुनिया के ताकतवर देशों के बीच बड़ी जंग छिड़ने वाली है? ये सवाल आप खुद पूछेंगे जब आपको हकीकत का अंदाजा होगा। तुर्की ने रूस के विमान को मार गिराया, इस बात को लेकर ना सिर्फ दोनों देश आमने-सामने खड़े हैं बल्कि दुनिया के कई देश भी इस झगड़े में कूद पड़े हैं। इस झगड़े में कौन किसकी साइड है, ये बाद में आपको आगे बताएंगे।

पहले तो ये जान लीजिए कि रूस ने तुर्की की इस हरकत का जवाब देने की तैयारी कर ली है। उसने तुर्की की सीमा के नजदीक सीरिया के लटाकिया में अपना सबसे ताकतवर बेड़ा तैनात कर दिया है। ये जगह तुर्की की सीमा से महज 30 मील दूर है लटाकिया में रूस का काफी पहले से एयर बेस है, जिसे मेमीम एयरबेस के नाम से जाना जाता है। सीरिया में आईएसआईएस आतंकियों पर बमबारी के लिए वो इसी एयर बेस का इस्तेमाल करता रहा है लेकिन अब उसके हथियारों की दिशा बदल गई है। लटाकिया में ऐसे हथियारों की तैनाती होने लगी है, जिससे तुर्की  में मिसाइल दागा जा सके।

इन्हीं में से एक है एस-400 डिफेंस मिसाइल सिस्टम, ये मिसाइल सिस्टम 250 किलोमीटर दूर तक मार करने में सक्षम है। इस एंटी एयरक्राफ्ट मिसाइल को तैनात करने का मतलब है कि अब रूस के किसी विमान या हेलीकॉप्टर की ओर बढ़ने वाले मिसाइल को बीच हवा में ध्वस्त कर दिया जाएगा।

इसके अलावा यहां पर चार SU-30 मल्टीरोल फाइटर एयरक्रॉफ्ट की तैनात किया गया है। 12 SU-25 अटैक एयक्रॉफ्ट को यहां उतार दिया गया है। 7 MI-24 हेलीकॉप्टर और T-90 टैंक्स को भी इस बेड़े में शामिल किया गया है।

अब आपको इन हथियारों की खासियत बताते हैं।  टी-90 टैंक्स में इतने तगड़े सेंसर लगे हैं कि ये अपनी तरफ आने वाली किसी भी गाड़ी को ढाई किलोमीटर दूर से ही भांप लेगा। दिन हो या रात, ये अपने दुश्मनों पर अभेद निशाना लगाने में माहिर है।  रूस के SU-25 और SU-30 हवा से हवा में मार करने वाले ऐसे एयरक्राफ्ट हैं जो अपने साथ 10 से ज्यादा मिसाइलें लेकर उड़ान भर सकते हैं  और एक वक्त में 2 से 3 मिसाइलें दाग सकते हैं।

क्या है रूस का इरादा?

अब आपको रूस के वो वॉर रूम के बारे में बताते हैं, वॉर रूम जहां खुद राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन बैठकर अपनी जंगी बेड़े की एक-एक हरकत पर नजर रख रहे हैं। एक बड़े से हॉल में रूसी सेना के सभी बड़े अधिकारी सामने लगे विशाल प्रोजेक्टर के जरिए उन सभी जगहों का जायजा ले रहे हैं, जहां रूसी सेना लड़ाई लड़ रही है। कौन सा टैंक किधर जा रहा है, किस लड़ाकू विमान ने उड़ान भर ली है, किस बेड़े की पोजीशन कहां है?

सबकुछ सैटेलाइट और आधुनिक तकनीक की मदद से यहां पता चल रहा है। पुतिन अपने खास सहयोगियों से बातकर लगातार रूसी सेना की रणनीति बना रहे हैं। रूस पहले ही कह चुका है कि उसके फाइटर प्लेन को मारकर तुर्की ने उसकी पीठ में छुरा घोंपा है। तुर्की  भले ही अपनी सफाई दे रहा हो, लेकिन उसकी हर बात को रूस नजरअंदाज कर रहा है। तुर्की के हमले के बावजूद जिंदा बच गए रूसी पायलट का कहना है कि उनका विमान तुर्की की सीमा में नहीं था, और ना ही हमले से पहले उन्हें कोई चेतावनी दी गई।

इन तस्वीरों को देखने के बाद अब कई पश्चिमी देशों में भी हलचल हो रही है। उधर तुर्की से एक ऑडियो क्लिप जारी कर दावा किया कि रूसी एयरक्राफ्ट को चेतावनी दी गई थी। तुर्की  के प्रधानमंत्री ने बयान दिया कि उनकी सेना ने तुर्की सीमा में घुस आए एक एयरक्राफ्ट को निशाना बनाया था, उन्हें नहीं पता था कि वो एयरक्राफ्ट रूस का है।

इन सारी सफाई के बावजूद रूस यही कह रहा है कि उसके विमान को जानबूझकर निशाना बनाया गया। इस बीच अमेरिका ने कहा है कि नाटो और अमेरिका तुर्की के साथ हैं। अमेरिका के मुताबिक तुर्की को अपनी सीमा की सुरक्षा करने का पूरा हक है। इतना ही नहीं अब ये भी कहा जाने लगा है कि सीरिया में आईएसआईएस आतंकियों को मारने के नाम पर रूस सीरिया में रह रहे तुर्की मूल के लोगों को निशाना बना रहा है, जिन्हें तुर्कमेन कहा जाता है।
जाहिर है दोनों तरफ से खुद को सही साबित करने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन दावों से परे रूस अपने सैनिक बेड़े को मजबूत करने में जुटा है। एक ऐसा बेड़ा जिसका मुकाबला करने में दुनिया के ताकतवर देशों को भी पसीना आ जाएगा। आपको याद दिला दें कि प्रथम विश्व युद्ध और द्वितीय विश्व युद्ध भी दो देशों के बीच उठे विवाद के बाद शुरू हुआ था। जिसके बाद दुनिया के सभी ताकतवर मुल्क अपनी-अपनी पसंद की साइड चुनकर लड़ाई में कूद पड़े थे। अब आशंका जताई जा रही है कि तुर्की और रूस का झगड़ा भी इसी तरफ बढ़ जाएगा, अगर मौजूदा विवाद को तुरंत रोका नहीं गया।


Thursday, 26 November 2015

કોઈનો લાડકવાયો

રક્ત ટપકતી સો સો ઝોળી સમરાંગણથી આવે
કેસરવરણી સમરસેવિકા કોમલ  સેજ  બિછાવે

ઘાયલ મરતાં મરતાં રે
માતની આઝાદી  ગાવે

કોની  વનિતા  કોની માતા   ભગિની  ટોળે  વળતી
શોણિતભીના પતિ-સુત-વીરની રણશૈયા પર લળતી

મુખથી ખમ્મા ખમ્મા કરતી
માથે   કર   મીઠો   ધરતી

થોકે થોકે લોક  ઊમટતા રણજોધ્ધા જોવાને
શાબાશીના શબ્દ બોલતા પ્રત્યેકની પિછાને

નિજ   ગૌરવ    કેરે   ગાને
જખમી જન જાગે અભિમાને

સહુ સૈનિકનાં વહાલાં જનનો મળિયો જ્યાં સુખમેળો
છેવાડો   ને   એકલવાયો    અબોલ  એક   સૂતેલો

અણપૂછયો અણપ્રીછેલો
કોઈનો અજાણ લાડીલો

એનું  શિર  ખોળામાં  લેવા  કોઈ જનેતા ના'વી
એને સીંચણ તેલ-કચોળા નવ કોઈ બહેની લાવી

કોઈના    લાડકવાયાની
ન કોઈએ ખબર પૂછાવી

ભાલે એને બચીઓ ભરતી  લટો  સુંવાળી  સૂતી
સન્મુખ ઝીલ્યાં ઘાવો મહીંથી ટપટપ છાતી ચૂતી

કોઈના    લાડકવાયાની
આંખડી અમૃત નીતરતી

કોઈના એ લાડકવાયાનાં લોચન લોલ બિડાયાં
આખરની સ્મૃતિનાં બે આંસુ કપોલ પર ઠેરાયાં

આતમ-દીપક   ઓલાયા
ઓષ્ટનાં ગુલાબ કરમાયાં

કોઈના એ લાડકડા પાસે હળવે પગ સંચરજો
હળવે એનાં  હૈયા ઉપર  કર-જોડામણ કરજો

પાસે   ધૂપસળી    ધરજો
કાનમાં પ્રભુપદ ઉચ્ચરજો

વિખરેલી એ લાડકડાની સમારજો લટ ધીરે
એને ઓષ્ટ-કપોલે-ભાલે  ધરજો ચુંબન ધીરે

સહુ માતા ને ભગિની રે
ગોદ  લેજો  ધીરે  ધીરે

વાંકડિયા એ ઝુલ્ફાંની મગરૂબ હશે કો માતા
એ ગાલોની સુધા પીનારા હોઠ હશે બે રાતા

રે! તમ ચુંબન ચોડાતાં
પામશે લાડકડો શાતા

એ લાડકડાની  પ્રતિમાનાં  છાનાં પૂજન કરતી
એની રક્ષા કાજે અહરનિશ પ્રભુને પાયે પડતી

ઉરની     એકાંતે     રડતી
વિજોગણ હશે દિનો ગણતી

કંકાવટીએ આંસુ ધોળી છેલ્લું તિલક કરતાં
એને કંઠ વીંટાયાં  હોશે  કર બે  કંકણવંતા

વસમાં  વળામણાં   દેતાં
બાથ ભીડી બે પળ લેતાં

એની કૂચકદમ જોતી   અભિમાન  ભરી મલકાતી
જોતી એની રૂધિર છલક્તી ગજગજ પ્હોળી છાતી

અધબીડ્યાં બારણિયાંમાંથી
રડી હશે કો આંખ બે રાતી

એવી કોઈ પ્રિયાનો  પ્રીતમ આજ ચિતા પર પોઢે
એકલડો  ને  અણબૂઝેલો   અગન પિછોડી ઓઢે

કોઈના    લાડકવાયાને
ચૂમે પાવકજ્વાલા મોઢે

એની ભસ્માંકિત ભૂમિ પર ચણજો આરસ-ખાંભી
એ પથ્થર પર કોતરશો  નવ કોઈ કવિતા લાંબી

લખજો: 'ખાક પડી આંહી
કોઈના    લાડકવાયાની'
-ઝવેરચંદ મેઘાણી

પ્રભો અંતર્યામી...


પ્રભો  અંતર્યામી,  જીવન  જીવના દીનશરણા
  પિતા  માતા  બંધુ, અનુપમ સખા  હિતકરણા
    પ્રભા કીર્તિ કાંતિ, ધન વિભવ,  સર્વસ્વ જનના
       નમું છું  વંદું છું  વિમળમુખ  સ્વામી જગતના

         સહુ અદ‌્ભુતોમાં તુજ સ્વરૂપ અદ‌્ભુત નીરખું
       મહા જ્યોતિ  જેવું નયન શશિ ને સૂર્ય સરખું
    દિશાની ગુફાઓ પૃથ્વી  ઊંડું આકાશ ભરતો
પ્રભો  તે સૌથીએ પર  પરમ તું  દૂર ઊડતો

પ્રભો તું આદિ છે  શુચિ પુરુષ પુરાણ તું જ છે
  તું સૃષ્ટિ ધારે  છે સૃજન પ્રલયે  નાથ તું જ છે
    અમારા  ધર્મોનો  અહર્નિશ  ગોપાલ  તું જ છે
      અપાપી પાપીનું  શિવ સદન કલ્યાણ તું જ છે

        પિતા છે એકાકી  જડ સકલ ને ચેતન  તણો
     ગુરૂ છે મોટો છે જનકુલ તણો પૂજ્ય તું  ઘણો
  ત્રણે લોકે દેવા નથી તું જ સમો અન્ય ન થશે
વિભુરાયા તુંથી  અધિક પછી તો કોણ જ હશે

વસે બ્રહ્માંડોમાં  અમ ઉર વિશે વાસ  વસતો
  તું આઘેમાં આઘે પણ સમીપમાં નિત્ય હસતો
     નમું આત્મા ઢાળી નમન લળતી દેહ  નમજો
        નમું કોટિ વારે  વળી પ્રભુ નમસ્કાર જ  હજો

         અસત્યો માંહેથી પ્રભુ પરમ સત્યે તું લઈ જા
      ઊંડા અંધારેથી  પ્રભુ પરમ તેજે  તું લઈ જા
   મહામૃત્યુમાંથી અમૃત સમીપે  નાથ લઈ જા
તું હીણો હું છું તો તુજ દરસનાં દાન દઈ જા

પિતા પેલો  આઘે  જગત વીંટતો સાગર રહે
   અને  વેગે  પાણી સકલ નદીનાં તે ગમ વહે
     વહો એવી  નિત્યે મુજ જીવનની સર્વ ઝરણી
        દયાના  પુણ્યોના  તુજ પ્રભુ મહાસાગર ભણી

         થતું  જે  કાયાથી  ઘડીક ઘડી વાણીથી ઉચરું
       કૃતિ  ઇંદ્રિયોની મુજ મન વિશે ભાવ જ સ્મરું
    સ્વભાવે બુદ્ધિથી  શુભ અશુભ  જે કાંઈક  કરું
ક્ષમાદષ્ટે જોજો  તુજ  ચરણમાં  નાથજી ધરું

-મહાકવિ નાનાલાલ

दुनियाभर में ISIS के खिलाफ लड़ाई क्या तीसरे विश्व युद्ध की दस्तक है?

नई दिल्ली। क्या दुनिया एक बार फिर विश्व युद्ध की तरफ बढ़ रही है? क्या अमेरिका-रूस फिर जंग के मैदान में आमने-सामने होंगे? क्या ISIS के खिलाफ लड़ाई तीसरे विश्व युद्ध में बदल जाएगी? ये सवाल जितने गंभीर हैं, उतने ही चिंताजनक भी। अब तक ISIS के खिलाफ लड़ाई में एकजुट नजर आ रहे देशों की सच्चाई सामने आने लगी है। इसका सबूत है सीरिया में ISIS पर बमबारी करके लौट रहे रूस के विमान का गिराया जाना। अमेरिका और रूस की आपसी खींचतान का नतीजा इस हमले के तौर पर सामने आया और तुर्की ने रूस के लड़ाकू विमान को मिसाइल मारकर गिरा दिया।

शीत युद्ध के बाद रूस के खिलाफ ये नाटो की तरफ से सबसे बड़ी कार्रवाई है। विमान गिराने के बाद रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमिर पुतिन ने इसे पीठ में छुरा घोंपने जैसा करार दिया। पुतिन ने कहा कि इस हमले के बाद तुर्की को गंभीर नतीजे भुगतने होंगे। पुतिन ने दुनिया भर के लोगों से तुर्की जाने को भी मना किया।

बेहद ही आक्रामक और सख्त माने जाने वाले पुतिन का ये बयान नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। पिछले दिनों मिस्र में जब ISIS ने रूस के विमान में धमाका करके उसके गिरा दिया था तो पुतिन ने कहा था कि दुश्मन दुनिया के किसी भी कोने में हो वो उसे खत्म करके ही दम लेंगे। इसके बाद रूस ने ISIS के खिलाफ हमले बढ़ा दिए थे। लेकिन तुर्की की कार्रवाई ने उसे दोहरा झटका दिया है। अब दुनिया की नजर पुतिन के अगले कदम पर है। सवाल है कि क्या अगले कुछ घंटों में लिए जाने वाले पुतिन के फैसले दुनिया को फिर जंग के मैदान में बदल देंगे।

नाटो और रूस फिर आए आमने-सामने   

तनाव बढ़ता देख तुर्की ने तुरंत नाटो देशों की आपातकाल बैठक बुलाने की मांग की। बैठक में हमले के असर को लेकर माथापच्ची हुई। इसके बाद नाटो के मुखिया ने दो टूक कह दिया कि वो हर कीमत पर तुर्की के साथ खड़े हैं। उत्तर अटलांटिक संधि संगठन यानि नाटो में दुनिया के 28 देश शामिल हैं। 1949 में खासतौर पर रूस के खिलाफ नाटो का गठन किया गया। दुनिया के कुल रक्षा खर्च का 70% खर्च नाटो देश ही करते हैं।

इस संगठन की आपात बैठक में तुर्की ने कहा कि उसने रूस के विमान को 5 मिनट के भीतर 10 बार चेतावनी दी थी कि वो उसके वायुक्षेत्र का उल्लंघन कर रहा है। तुर्की के राजदूत ने संयुक्त राष्ट्र में भी ये जानकारी दी कि रूस के विमान 17 सेकेंड के लिए तुर्की के आसमान में एक मील तक भीतर घुस आए थे।

वहीं रूस लगातार ये कह रहा है कि उसके विमान सीरिया की सीमा के भीतर कार्रवाई कर रहे थे। पुतिन बदला लेने के लिए तैयार हैं। वो नाटो के सामने कमजोर पड़ते दिखना नहीं चाहते। रूस के विदेश मंत्री की तुर्की यात्रा तुरंत रद्द कर दी गई है। सीरिया के पास समुद्र में मिसाइलों से लैस जहाज तैनात कर दिया गया है। रूस के हर लड़ाकू विमान को दूसरे लड़ाकू विमान से कवर किया जा रहा है।

रूस के आर्मी चीफ ने धमकी दी है कि उसके विमान को गिराने वालों को गंभीर नतीजे भुगतने होंगे। जाहिर है ऐसी धमकियां इस चर्चा को बढ़ा रही हैं कि क्या ये बदला तुर्की और उसके सहयोगी देशों पर हमला करके लिया जाएगा। पुतिन के पास ऐसा करने की सियासी वजहें भी हैं। पश्चिमी देश लगातार ये आरोप लगा रहे हैं कि रूस सीरिया में ISIS के खिलाफ कार्रवाई से ज्यादा वहां पर राष्ट्रपति असद के विरोधियों को तबाह कर रहा है। वहीं रूस का आरोप है कि तुर्की सीरिया और इराक से निकलने वाले कच्चे तेल पर नजर गड़ाए हुए है और वो ISIS से तेल खरीद भी रहा है।

जाहिर है रूस और तुर्की के बीच बढ़ते तनाव में ISIS के खिलाफ लड़ाई जा रही जंग पर असर पड़ेगा। एक तरफ नाटो है तो दूसरी तरफ रूस है। दोनों ही सीरिया और इराक के इस इलाके में अपने-अपने दबदबे को बढ़ाने के लिए आमने-सामने आ गए हैं।

पुतिन का वॉर रूम देख हैरान रह गई दुनिया         

मॉस्को में बनाए गए अपने आधुनिक वॉर रूम में पुतिन अपने सहयोगियों के साथ माथापच्ची कर रहे हैं। पिछले हफ्ते जब रूस ने पूरी दुनिया के सामने अपने वॉर रूम की ये तस्वीरें सार्वजनिक कीं। तो लोग हैरत में रह गए। तीन मंजिला इस इमारत में फुटबॉल के छोटे मैदान जितनी बड़ी-बड़ी स्क्रीन लगी हैं। राष्ट्रपति ब्लादिमिर पुतिन खुद सीरिया और दुनियाभर में चल रहे रूस की सैनिक कार्रवाई पर यहां से नजर रखते हैं।

सीरिया में उड़ रहे लड़ाकू विमान की तस्वीरें यहां हजारों किलोमीटर दूर लाइव दिखाई जा रही हैं। विमान जब बम गिराता है तो भी इस बड़ी स्क्रीन पर नजर आता है। बम गिरने के बाद जमीन पर क्या असर हुआ? ये भी इस बड़ी स्क्रीन पर लाइव दिखाई देता है। ISIS के कौन-कौन से ठिकाने तबाह किए गए इसकी जानकारी बम गिरने के कुछ ही सेकेंड में इस वॉर रूम की स्क्रीन पर नजर आने लगती है। ISIS को रूस कितनी चोट पहुंचा रहा है वो यहां लाइव दिखाई देता है।

सीरिया में चल रही कार्रवाई की इन लाइव तस्वीरों की रूसी सेना के बड़े सैनिक अफसर लगातार पड़ताल करते रहते हैं। खुद राष्ट्रपति पुतिन एक-एक बारीकी समझने की कोशिश करते हैं। सामने स्क्रीन पर सैनिक कार्रवाई से जुड़ी हर जानकारी थोड़ी-थोड़ी देर पर नजर आती रहती है। जब सीरिया के आसमान में विमान उड़ रहा होता है तो पुतिन के चेहरे पर चिंता साफ देखी जा सकती है। इसी वॉर रूम में बैठकर पुतिन दूसरे ठिकानों पर बैठे सेना के अफसरों से सीधे बात करते हैं।

दुनिया का सबसे आधुनिक ये वॉर रूम 10 साल में बनकर तैयार हुआ है। कहा जा रहा है कि अमेरिका के पास भी ऐसा वॉर रूम नहीं है। इसे बनाने में कितनी रकम खर्च हुई इसका खुलासा रूस ने नहीं किया है। रूस के रक्षा मंत्री का कहना है कि दुश्मन के खिलाफ रणनीति बनाने और उस रणनीति पर अमल होते हुए देखने के लिए ये सेंटर काफी अहम है। सूत्रों के मुताबिक जब पुतिन को सीरिया में अपने हवाई जहाज को गिराए जाने की जानकारी हुई तो वो सबसे पहले इसी वॉर रूम में पहुंचे थे।

इस वॉर रूम से दुनिया में कहीं से भी, किसी भी वक्त संपर्क किया जा सकता है। इस वॉर रूम को मॉस्को के पास मॉस्कवा नदी के पास बनाया गया है। रूसी मीडिया के मुताबिक यहां तक हेलीकॉप्टर के जरिए पहुंचा जा सकता है और किसी दुश्मन के हमले के वक्त यहां आने में दिक्कत ना हो इसलिए जमीन के भीतर सुरंग का जाल भी बिछाया गया है। माना जाता है कि रूस की सेना को आधुनिक बनाने के पुतिन के दस साल के प्लान का ये वॉर रूम अहम हिस्सा है।

परमाणु युद्ध की ओर जाएगी नाटो-रूस की तनानती?

पिछले कुछ सालों से अमेरिका की कमान में नाटो देश लगातार रूस को घेरते जा रहे हैं। बौखलाया हुआ रूस कुछ भी कर सकता है। अगर नाटो और रूस के बीच जंग होती है तो परमाणु बम के इस्तेमाल की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता। इसकी एक वजह ये भी है कि पारंपरिक युद्ध में रूस अब अमेरिका से जीत नहीं सकता।

--अमेरिका का रक्षा बजट 560 अरब डॉलर है तो रूस का रक्षा बजट 60 अरब डॉलर है। 

--अमेरिका के पास 13 लाख 50 हजार सैनिक हैं तो रूस के पास उससे कम 8 लाख 45 हजार सैनिक हैं। 

--अमेरिका के पास 3290 लड़ाकू विमान हैं तो रूस के पास 1200 लड़ाकू विमान हैं।       

--अमेरिका के पास लंबी दूरी के 157 लड़ाकू विमान हैं तो रूस के पास ऐसे 180 विमान हैं।       

--अमेरिका के पास 272 जंगी जहाज का बेड़ा है तो रूस के बेड़े में 217 जंगी जहाज हैं। 

--अमेरिका के पास 10 एयरक्राफ्ट करियर जहाज हैं तो रूस के पास ऐसा सिर्फ एक जहाज है।     

--अमेरिका के पास 71 सबमरीन हैं तो रूस के पास 59 सबमरीन हैं। 

--अमेरिका के पास 7100 परमाणु बम हैं तो रूस के पास 7700 परमाणु बम हैं   ।

रूस को घेरने के लिए ही इसी महीने नाटो देशों ने पिछले बड़ा सैन्य अभ्यास पूरा किया है। पिछले दस साल मे ये सबसे बड़ी एक्सरसाइज थी जिसमें तीस देशों के 36 हजार सैनिकों ने हिस्सा लिया था। जमीन, आसमान और समंदर में मिलकर नाटो सेनाओं ने जंग की प्रैक्टिस की थी। इससे पहले साल 2002 में इतने बड़े पैमाने पर युद्ध अभ्यास किया गया था। इस अभ्यास के बाद अब भी रूसी सीमा के पास 4 हजार से ज्यादा नाटो सैनिक तैनात हैं जो किसी भी वक्त जवाबी कार्रवाई शुरू कर सकते हैं।by ibn khabar


KHEL-MAHAKUMBH :-2015 NA AAYOJAN NU TIME-TABLE.


Wednesday, 25 November 2015

भारत के मुख्य न्यायाधीश


नाम कार्यकाल
हरिलाल जे. कानिया  26 जनवरी 1950 - 6 नवंबर 1951
एम. पतंजलि शास्त्री  7 नवंबर 1951 - 3 जनवरी 1954
मेहर चंद महाजन 4 जनवरी 1954 - 22 दिसंबर 1954
बी.के. मुखर्जी  23 दिसंबर 1954 - 31 जनवरी 1956
एस.आर. दास  01 फरवरी 1956 - 30 सितंबर 1959
भुवनेश्वर प्रसाद सिन्हा  1 अक्टूबर 1959 - 31 जनवरी 1964
पी.बी. गजेंद्रगडकर  1 फरवरी 1964 - 15 मार्च 1966
ए.के. सरकार  16 मार्च 1966 - 29 जून 1966
के. सुब्बा राव  30 जून 1966 - 11 अप्रैल 1967
के.एन. वांचू  12 अप्रैल 1967 - 24 फरवरी 1968
एम. हिदायतुल्लाह  25 फरवरी 1968 - 16 दिसंबर 1970
आई.सी. शाह 17 दिसंबर 1970 - 21 जनवरी 1971
एस.एम. सीकरी 22 जनवरी 1971 - 25 अप्रैल 1973
ए.एन. रे  26 अप्रैल 1973 - 27 जनवरी 1977
एम.एच. बेग  28 जनवरी 1977 - 21 फरवरी 1978
वाई.वी. चंद्रचूड़ 22 फरवरी 1978 - 11 जुलाई 1985
पीएन भगवती 12 जुलाई 1985 - 20 दिसंबर 1986
आर.एस. पाठक 21 दिसंबर 1986 - 18 जून 1989
ई.एस. वेंकटरमैया 19 जून 1989 - 17 दिसंबर 1989
एस. मुखर्जी 18 दिसंबर 1989 - 25 सितंबर 1990
रंगनाथ मिश्र 26 सितंबर 1990 - 24 नवंबर 1991
के.एन. सिंह  25 नवंबर 1991 - 12 दिसंबर 1991
एम.एच. कानिया  13 दिसंबर 1991 - 17 नवंबर 1992
आई.एम. शर्मा  18 नवंबर 1992 - 11 फरवरी 1993
एम.एन. वेंकटचलैया 12 फरवरी 1993 - 24 अक्टूबर 1994
ए.एम. अहमदी  25 अक्टूबर 1994 - 24 मार्च 1997
जे. एस. वर्मा 25 मार्च 1997 - 17 जनवरी 1998
एम.एम. पंछी  18 जनवरी 1998 - 9 अक्टूबर 1998
ए.एस. आनंद  10 अक्टूबर 1998 - 31 अक्टूबर 2001
एस. पी. भरूचा 01 नवंबर 2001 - 5 मई 2002
बी.एन. कृपाल  6 मई 2002 - 7 नवंबर 2002
जी. बी. पटनायक  8 नवंबर 2002 - 18 दिसंबर 2002
वी. एन. खरे 19 दिसंबर 2002 - 1 मई 2004
एस. राजेंद्र बाबू 02 मई 2004 - 31 मई 2004
आर. सी. लाहोटी  01 जून 2004 - 31 अक्टूबर 2005
वाई. के. सब्बरवाल 01 नवंबर 2005 - 14 जनवरी 2007
के. जी. बालकृष्णन 14 जनवरी 2007 - 12 मई 2010
एस. एच. कपाड़िया 12 मई 2010 - 28 सितम्बर 2012
अल्तमस कबीर 29 सितम्बर 2012 - 19 जुलाई 2013
पालानीसामी सदाशिवम 19 जुलाई 2013 - 26 अप्रैल 2014
राजेन्द्र मल लोढ़ा 27 अप्रैल 2014 - 27 सितम्बर 2014
एच.एल दत्तु 28 सितम्बर 2014 - अब तक


भारत के प्रधानमंत्री


नाम कार्यकाल
जवाहरलाल नेहरू (1889 - 1964) अगस्त 15, 1947 - मई 27, 1964
गुलजारी लाल नंदा (1898 - 1997) (कार्यवाहक) मई 27, 1964 - जून 9, 1964
लाल बहादुर शास्‍त्री (1904 - 1966) जून 09, 1964 - जनवरी 11, 1966
गुलजारी लाल नंदा (1898 - 1997) (कार्यवाहक) जनवरी 11, 1966 - जनवरी 24, 1966
इंदिरा गांधी (1917 - 1984) जनवरी 24, 1966 - मार्च 24, 1977
मोरारजी देसाई (1896 - 1995) मार्च 24, 1977 - जुलाई 28, 1979
चरण सिंह (1902 - 1987) जुलाई 28, 1979 - जनवरी14 , 1980
इंदिरा गांधी (1917 - 1984) जनवरी 14, 1980 - अक्टूबर 31 , 1984
राजीव गांधी (1944 - 1991) अक्टूबर 31, 1984 - दिसंबर 01, 1989
विश्वनाथ प्रताप सिंह (1931 - 2008) दिसंबर 02, 1989 - नवंबर 10, 1990
चंद्रशेखर (1927 - 2007) नवंबर 10, 1990 - जून 21, 1991
पी. वी. नरसिम्हा राव (1921 - 2004) जून 21, 1991 - मई 16, 1996
अटल बिहारी वाजपेयी (1926) मई 16, 1996 - जून 01, 1996
एच. डी. देवेगौड़ा (1933) जून 01, 1996 - अप्रैल 21, 1997
इंद्रकुमार गुजराल (1933 - 2012) अप्रैल 21, 1997 - मार्च 18, 1998
अटल बिहारी वाजपेयी (जन्म - 1926) मार्च 19, 1998 - अक्टूबर 13, 1999
अटल बिहारी वाजपेयी (जन्म - 1926) अक्टूबर 13, 1999 - मई 22, 2004
डॉ. मनमोहन सिंह (जन्म - 1932) मई 22, 2004 - मई 26, 2014
नरेन्द्र मोदी (जन्म - 1950) मई 26, 2014 - वर्तमान तक


भारत के उप-राष्ट्रपति


नाम कार्यकाल
डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन (1888 - 1975) 1952 - 1962
डॉ. जाकिर हुसैन (1897 - 1969) 1962 - 1967
वराहगिरि वेंकटगिरि (1884 - 1980) 1967 - 1969
गोपाल स्वरूप पाठक (1896 - 1982) 1969 - 1974
बी.डी. जत्ती (1913 - 2002) 1974 - 1979
न्यायमूर्ति मोहम्मद हिदायतुल्लाह (1905 - 1992) 1979 - 1984
आर. वेंकटरमण (जन्म - 1910) 1984 - 1987
डॉ. शंकर दयाल शर्मा (1918 - 1999) 1987 - 1992
के. आर. नारायणन (1920 - 1925) 1992 - 1997
कृष्णकांत (1927 - 2002) 1997 - 2002
भैरों सिंह शेखावत (जन्म - 1923) 2002 - 2007
मोहम्मद हामिद अंसारी (जन्म - 1937) अगस्त 11, 2007 से वर्तमान तक


तुगलक राजवंश


गयासुद्दीन तुगलक, जो अला उद दीन खिलजी के कार्यकाल में पंजाब का राज्‍यपाल था, 1320 ए.डी. में सिंहासन पर बैठा और तुगलक राजवंश की स्‍थापना की। उसने वारंगल पर विजय पाई और बंगाल में बगावत की। मुहम्‍मद बिन तुगलक ने अपने पिता का स्‍थान लिया और अपने राज्‍य को भारत से आगे मध्‍य एशिया तक आगे बढ़ाया। मंगोल ने तुगलक के शासन काल में भारत पर आक्रमण किया और उन्‍हें भी इस बार हराया गया।
मुहम्‍मद बिन तुगलक ने अपनी राजधानी को दक्षिण में सबसे पहले दिल्‍ली से हटाकर देवगिरी में स्‍थापित किया। जबकि इसे दो वर्ष में वापस लाया गया। उसने एक बड़े साम्राज्‍य को विरासत में पाया था किन्‍तु वह कई प्रांतों को अपने नियंत्रण में नहीं रख सका, विशेष रूप से दक्षिण और बंगाल को। उसकी मौत 1351 ए.डी. में हुई और उसके चचेरे भाई फिरोज़ तुगलक ने उसका स्‍थान लिया।
फिरोज तुगलक ने साम्राज्‍य की सीमाएं आगे बढ़ाने में बहुत अधिक योगदान नहीं दिया, जो उसे विरासत में मिली थी। उसने अपनी शक्ति का अधिकांश भाग लोगों के जीवन को बेहतर बनाने में लगाया। वर्ष 1338 ने उसकी मौत के बाद तुगलक राजवंश लगभग समाप्‍त हो गया। यद्यपि तुगलक शासन 1412 तक चलता रहा फिर भी 1398 में तैमूर द्वारा दिल्‍ली पर आक्रमण को तुगलक साम्राज्‍य का अंत कहा जा सकता है।


खिलजी राजवंश


बलवन की मौत के बाद सल्‍तनत कमजोर हो गई और यहां कई बगावतें हुईं। यही वह समय था जब राजाओं ने जलाल उद दीन खिलजी को राजगद्दी पर बिठाया। इससे खिलजी राजवंश की स्‍थापना आरंभ हुई। इस राजवंश का राजकाज 1290 ए.डी. में शुरू हुआ। अला उद दीन खिलजी जो जलाल उद दीन खिलजी का भतीजा था, ने षड़यंत्र किया और सुल्‍तान जलाल उद दीन को मार कर 1296 में स्‍वयं सुल्‍तान बन बैठा। अला उद दीन खिलजी प्रथम मुस्लिम शासक था जिसके राज्‍य ने पूरे भारत का लगभग सारा हिस्‍सा दक्षिण के सिरे तक शामिल था। उसने कई लड़ाइयां लड़ी, गुजरात, रणथम्‍भौर, चित्तौड़, मलवा और दक्षिण पर विजय पाई। उसके 20 वर्ष के शासन काल में कई बार मंगोलों ने देश पर आक्रमण किया किन्‍तु उन्‍हें सफलतापूर्वक पीछे खदेड़ दिया गया। इन आक्रमणों से अला उद दीन खिलजी ने स्‍वयं को तैयार रखने का सबक लिया और अपनी सशस्‍त्र सेनाओं को संपुष्‍ट तथा संगठित किया। वर्ष 1316 ए.डी. में अला उद दीन की मौत हो गई और उसकी मौत के साथ खिलजी राजवंश समाप्‍त हो गया।