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Wednesday, 20 April 2016

ये हैं दुनिया की 8 सबसे खतरनाक पत्नियां, गुस्से में किया पति का ऐसा हश्र



इंटरनेशनल डेस्क. गुजराती मूल की महिला श्रिया पटेल (27) को अमेरिका की टेक्सास कोर्ट ने पति को जिंदा जलाकर मारने का दोषी पाया है। इस मामले में श्रिया को 20 साल कैद की सजा सुनाई गई है। मामले में एक चौंकाने वाली बात भी सामने आई है कि श्रिया ने शादी सिर्फ अपने ब्वॉयफ्रेंड को जेलस फील कराने के लिए की थी। ये पहली ऐसी घटना नहीं है, जिसमें वाइफ ने क्रूर तरीके से हसबैंड को मौत के घाट उतारा हो। हम आपको ऐसी ही 9 महिलाओं के बारे में बता रहे है, जिन्होंने किसी न किसी कारण से हसबैंड पर अत्याचार किया है...



कैथरीन नाइट
- 2000 में कैथरीन ने अपने एक्स हसबैंड जॉन चार्ल्स थॉमस प्राइस पर कसाई वाले चाकू से 37 बार हमला किया।
- उसकी बॉडी से स्किन खरोंचकर अपने लॉउन्ज रूम में मीट हुक में टांग दिया।
- सबसे पहले उसने सिर को एक स्टोव में पकाया और सब्जी के साथ पकाकर बच्चों को परोस दिया।
- पुलिस ने ऐसा करते हुए उसे अरेस्ट कर लिया था।
- कैथरीन ऑस्ट्रेलिया की पहली महिला है, जिसे नेचुरल उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। इसमें उसे लाइफटाइम पेरोल भी नहीं मिलेगा।







- रोम में 38 ईसापूर्व किंग क्लॉडियस का राज था। उसकी तीसरी पत्नी वेलेरिया मेसेलिना थी।
- वेलेरिया अपनी काम वासना के लिए कुख्यात थी। वह कर्मचारियों के साथ शराब की पार्टियां करती थी।
- वेलेरिया के दो बच्चे थे। जिनका पालन पोषण क्लॉडियस की पहली पत्नी केलीगुला ने किया था।
- केलीगुला की मौत के बाद वेलेरिया महारानी बन गई। वह रात में प्रॉस्टिट्यूट बनकर वेश्यालय में कस्टमर्स के साथ सेक्स करती थी।
- एक बार उसने रोम की सबसे फेमस प्रॉस्टिट्यूट सिसला के साथ एक कॉम्पटीशन रखा।
- इसमें अधिक से अधिक पुरुषों के साथ सेक्स करना था।
- वेलेरिया ने 24 घंटे में 25 पुरुषों के साथ रिलेशन बनाए और कॉम्पटीशन जीत लिया।
- उसने अपने पूर्व प्रेमी के साथ मिलकर किंग क्लॉडियस की हत्या की साजिश रची।
- लेकिन क्लॉडियस के एक एडवायजर ने इस योजना का खुलासा कर दिया।
- वेलेरिया को आदेश मिला कि वह सुसाइड कर ले, लेकिन वह ऐसा नहीं कर सकी।


क्रिस्टल बॉर्डर

- 46 साल के टोनी और क्रिस्टल बॉर्डर (31 साल) पिछले दस साल से मैरिड लाइफ में थे।
- वे दोनों अजीबोगरीब सेक्स गेम खेलते थे। कभी प्लास्टिक बैग के अंदर, तो कभी बॉथटब या खुद को टांगने के विचित्र तरीके अपनाते थे।
- एक बार टोनी ने सुरक्षित तरीके से क्रिस्टल को फांसी पर लटकाने का खेल किया।
- लेकिन बाद में जब उसकी बारी आई तो क्रिस्टल ने उसे 15 मिनट तक लटकाए रखा। इसके बाद जमीन पर उतारा।
- करीब 40 मिनट तक वह उसकी पल्स चेक करती रही। उसने सफाई में कहा कि सेक्स गेम के उससे एक्सीडेंटली मर्डर हो गया।
- बताया जाता है कि टोनी ने भी 1987 में खतरनाक सेक्स गेम में किसी की हत्या कर दी थी। उसे आठ साल की सजा भी मिली थी।


कात्या खारीटोवोनोवा

- 2009 में रूस की कात्या खारीटोवोनोवा (36) ने अपने हसबैंड मिखाइल (40) के प्राइवेट पार्ट को ही काट दिया।
- कात्या ने हसबैंड को उसकी गर्लफ्रेंड लिजा दमित्रियेवा के साथ सेक्स करते देख लिया था।
- दरअसल, मिखाइल और कात्या ने लिजा को खाने पर बुलाया था। खाना खाने के बाद सभी टीवी पर फिल्म देखने लगे और सो गए।
- लेकिन आधा घंटे बाद कात्या ने देखा कि उसका हसबैंड गर्लफ्रेंड के साथ रिलेशन बना रहा है।
- उसने गुस्से में एक लैंप फोड़ा और लिजा के सामने ही मिखाइल के प्राइवेट पार्ट काट डाला।
- कोर्ट ने कात्या को दो साल तक लेबर कैम्प में काम करने की सजा सुनाई थी।


स्टेसी कास्टर

- 41 साल की स्टेसी कॉस्टर ने 2005 में अपने सेकंड हसबैंड का मर्डर कर दिया। लेकिन इसे उसने आत्महत्या बताया।
- लेकिन पुलिस जांच में इथिनॉल ग्लेकॉल खिलाने की बात सामने आई।
- संदेह पर उसके पहले हसबैंड माइकल वॉलेस की मौत की जांच शुरू की गई। उसकी मौत को हार्ट अटैक बताया।
- पुलिस ने कब्र से उसके शव को निकाल कर टेस्ट करवाया तो इथिनॉल ग्लेकॉल पाया गया।
- कास्टर ने अपने टीनेजर बेटी एश्ले पर अपने पहले और दूसरे हसबैंड के मर्डर का आरोप लगाया।
- लेकिन पहले हसबैंड की मौत के वक्त एशले 11 साल की थी।
- लेकिन खुलासा होने पर कास्टर को 25 साल की सजा हुई।



365 रानियों में किसके साथ रात गुजारनी है, इस तरह चुनाव करते थे राजा साहब




इतिहास के पन्‍नों को पलटा जाए तो भारत के सैकड़ों राजाओं की अनोखी कहानियां सुनने या पढ़ने को मिलती हैं। हर राजा के राज में कुछ न कुछ इंट्रेस्‍टिंग बातें जरूर हुआ करती थीं। ऐसी ही एक कहानी है पटियाला के महाराजा भुपिंदर सिंह की, जो अपनी 365 रानियों के साथ कुछ इस तरह से रातें गुजारा करते थे।
365 रानियां के भव्‍य महल
पटियाला की पुरानी रियासत में महाराजा भुपिंदर सिंह राज किया करते थे। महाराजा भूपिंदर सिंह ने 1900 से 1938 तक राजगद्दी को संभाला। पुरानी रियासत के महल आज भी महाराजा भुपिंदर सिंह की 365 रानियों के किस्से बयान करते हैं। इतिहासकारों के मुताबिक महाराजा भूपिंदर सिहं की 10 अधिकृत रानियों सहित कुल 365 रानियां थीं। इन 365 रानियों के लिए पटियाला में भव्य महल बनाए गए थे। हालांकि महाराजा की रानियों के किस्से तो अब इतिहास में दफन हो चुके हैं। लेकिन उनकी कुछ पुरानी बातें आज भी लोगों को याद हैं।

रानी के नाम की लालटेन बुझती थी
दीवान जरमनी दास के मुताबिक महाराजा भूपिंदर सिंह की दस पत्नियों से 83 बच्चे हुए थे। इनमें 53 ही जिंदा बच पाए थे। महाराजा पटियाला के महल में रोजाना 365 लालटेनें जलाई जाती थीं। हर लालटेन पर उनकी 365 रानियों के नाम लिखे होते थे। जो लालटेन सुबह पहले बुझती थी महाराजा उस लालटेन पर लिखे रानी के नाम को पढ़ते थे। फिर उसी के साथ रात गुजारते थे।

10 एकड़ क्षेत्र में फैला है किला
महाराजा भुपिंदर सिंह का किला पटियाला शहर के बीचोबीच 10 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है। मुख्य महल, गेस्ट हाउस और दरबार हॉल इस किले के परिसर के प्रमुख भाग हैं। इस परिसर के बाहर दर्शनी गेट, शिव मंदिर और दुकानें हैं। इन दोनों महलों को बड़ी संख्‍या में भीत्ति चित्रों से सजाया गया है, जि‍न्हें महाराजा नरेन्द्र सिंह की देखरेख में बनवाया गया था। किला मुबारक के अंदर बने इन महलों में 16 रंगे हुए और कांच से सजाए गए चैंबर हैं।


छप्परफाड़ ऑफर, 50 रुपये में 20 जीबी 3G इंटरनेट



खुशखबरी! मोबाइल यूजर्स के लिए बीएसएनएल ने एक आकर्षक ऑफर निकाला है, जिसके तहत अब पूरे देश में बिना कनेक्शन इंटरनेट सेवा दी जाएगी। इस स्कीम के मुताबिक यूजर को सिर्फ इंटरनेट कनेक्शन लेना होगा। उस एक कनेक्शन में 4 यूजर्स कनेक्ट हो सकते हैं और बिना कनेक्शन इंटरनेट यूज कर सकते हैं। तो है ना ये बेहतरीन ऑफर।



सरकार हर किसी को इंटरनेट उपल्ब्ध कराना चाहती है और ये योजना डिजिटल इंडिया को बढ़ावा देने का काम करेगी। इस योजना की सबसे खास बात ये है कि बीएसएनएल यूजर देश के किसी भी कोने में रहने वाले अन्य बीएसएनएल यूजर को अपने साथ कनेक्ट कर सकता है। अब ये योजना काम कैसे करती है ये भी आपको बता देते हैं। इस सुविधा को लेने के लिए यूजर को बीएसएनएल मोबाइल सेफ केयर पोर्टल पर जाना होगा और सारी डिटेल्स फिल करनी होगी। इस पोर्टल में आपसे चार मोबाइल यूजर्स के नंबर मांगे जाएंगे, जिन्हें आप अपने कनेक्शन के साथ कनेक्ट करना चाहते हैं। बस इसके बाद पांचों यूजर्स 3 जी स्पीड से एकसाथ इंटरनेट का मजा ले सकेंगे और इन सब का बिल मुख्य यूजर को देना पड़ेगा, जिसने कनेक्शन लिया है।



कहीं ज्यादा पैसे खर्च होने से परेशान तो नहीं हो गए, घबराइए मत। इस स्कीम से इंटरनेट काफी सस्ता हो जाएगा। एक महीने में एक यूजर कम से कम 1 जीबी डाटा यूज करता है जिसकी कीमत करीब 200 रुपए पड़ती है, अगर आप इस स्कीम के तहत 5 जीबी डाटा वाला प्लान लेते हैं, तो हर यूजर को 100 रुपए खर्च करना पड़ेगा। ये तो कुछ भी नहीं, आप 50 रुपए प्रति महीने में भी इंटरनेट यूज कर सकते हैं लेकिन उसके लिए आपको 20 जीबी का प्लान लेना होगा।


बीएसएनएल के प्रधान महाप्रबंधक रामशब्द यादव के मुताबिक सरकार 100 फीसदी लोगों के हाथ में इंटरनेट देना चाहती है, जिसके चलते ये प्लान जल्द ही लागू कर दिया जाएगा। इस प्लान के खास फीचर के चलते ये प्लान फैमली लविंग होने वाला है, क्योंकि अब एक परिवार में अलग अलग इंटरनेट पैक डलवाने की कोई जरुरत नहीं है। अब घर के सभी सदस्य कम कीमत पर इंटरनेट का उपयोग कर पाएंगे।


Sunday, 17 April 2016

सिंहस्थ 2016 : महाकालेश्वर मंदिर दर्शन




वृजेन्द्रसिंह झाला


अवन्तिकायां विहितावतारम् मुक्तिप्रदानाय च सज्जनानाम।
अकालमृत्यो: परिरक्षणार्थं वन्दे महाकालमहं सुरेशम्।।
आशुतोष भगवान महाकालेश्वर अपने भक्तों एवं संतजनों के उद्धार के लिए उज्जयिनी में स्वयंभू शिवलिंग के रूप में विराजित हैं। धर्मयात्रा की इस कड़ी में हम आपको लेकर चल रहे हैं मध्यप्रदेश के प्राचीनतम नगर अवंतिका यानी उज्जैन की यात्रा पर...
भारत के हृदयस्थल मध्यप्रदेश के उज्जैन में पुण्यसलिला क्षिप्रा के निकट भगवान शिव महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के रूप में विराजमान हैं। इसकी गणना देश के प्रसिद्ध द्वादश ज्योतिर्लिंगों में की जाती है। शिवपुराण में वर्णित एक कथा के अनुसार उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर योगेश्वर श्रीकृष्ण के पालक नंदबाबा की आठ पीढ़ी पूर्व का है। महाकालेश्वर को पृथ्‍वी का अधिपति भी माना जाता है। महाकालेश्वर को पृथ्वीं का अधिपति भी माना जाता है। इस संबंध में एक श्लोक भी है...
आकाशे तारकं लिंग पाताले हाटकेश्वरम्।
मृत्युलोके महाकालं लिंगत्रयं नमोस्तुऽते॥
इस मंदिर का पुनर्निर्माण 11वीं शताब्दी में हुआ था, लेकिन इसके 140 वर्ष बाद मुस्लिम आक्रमणकारी इल्तुतमिश ने इसे क्षतिग्रस्त कर दिया था। वर्तमान मंदिर मराठाकालीन माना जाता है। इसका जीर्णोद्धार तत्कालीन सिंधिया राज्य के दीवान बाबा रामचंद्र शैणवी ने करवाया था।

ऐसी मान्यता है कि उज्जयिनी का एक ही राजा है और वे हैं भूतभावन महाकालेश्वर। यही वजह है कि पुराने समय से ही कोई राजा उज्जैन में रात्रि विश्राम नहीं करता और ना ही राजा की तरह महाकालेश्वर के दर्शन करता है। 
महाकालेश्वर मंदिर एक विशाल परिसर में स्थित है, जहां कई देवी-देवताओं के छोटे-बड़े मंदिर हैं। गर्भगृह में भगवान महाकालेश्वर का विशाल और विश्व का एकमात्र दक्षिणमुखी शिवलिंग है और इसकी जलाधारी पूर्व की तरफ है, जबकि दूसरे शिवलिंगों की जलाधारी उत्तर की तरफ होती है। साथ ही महाकालेश्वर मंदिर के शिखर के ठीक ऊपर से कर्क रेखा भी गुजरती है, इसलिए इसे पृथ्वी का नाभिस्थल भी माना जाता है।

ज्योतिष और तंत्र-मंत्र की दृष्टि से भी महाकाल का विशेष महत्व माना गया है। साथ ही गर्भगृह में माता पार्वती, भगवान गणेश व कार्तिकेय की मनमोहक प्रतिमाएं हैं। महाकाल मंदिर का सबसे बड़ा आकर्षण है भोलेनाथ की भस्म आरती, जो प्रात: 4 से 6 बजे तक होती है।

गर्भगृह में नंदी दीप भी स्थापित है, जो सदैव प्रज्जवलित रहता है। गर्भगृह के सामने विशाल कक्ष में नंदी की विशाल प्रतिमा स्थापित है। इस कक्ष में बैठकर हजारों श्रद्धालु शिव आराधना का पुण्यलाभ लेते हैं। मंदिर परिसर में ही एक विशाल कुंड है, जिसे कोटितीर्थ के नाम से जाना जाता है। महाकालेश्वर परिसर में कई दर्शनीय मंदिर हैं। इनमें नागचंद्रेश्वर मंदिर वर्ष में एक बार नागपंचमी के दिन ही श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोला जाता है।


महाकाल मंदिर के विशेष उत्सव एवं पर्व : यूं तो महाकाल मंदिर में वर्षभर उत्सव का ही माहौल रहता है, लेकिन विशेष अवसरों पर यहां विशेष उत्सवों का आयोजन होता है। श्रावण मास के प्रत्येक सोमवार को राजाधिराज महाकाल की विशेष सवारी निकलती है, जब महाकालेश्वर नगर भ्रमण कर नगरवासियों को दर्शन देते हैं। वैकुंठ चतुर्दशी पर हरिहर मिलन सवारी यानी हरि (विष्णु) और हर (शिव) का मिलन होता है।  फाल्गुन कृष्ण पंचमी या षष्ठी से महाशिव रात्रि तक शिव नवरात्रि के दौरान भगवान शिव का विशेष श्रृंगार किया जाता है। महाशिवरात्रि के दिन विशेष उत्सव होते हैं। 

महाकालेश्वर की आरती का समय :
प्रात: 4 से 6 बजे तक भस्म आरती
प्रात: 7.30 से 8.15 बजे तक नैवेद्य आरती
सायं 5 बजे से जलाभिषेक बंद
सायं 6.30 बजे से 7 बजे तक संध्या आरती
रा‍त्रि 10.30 बजे शयन आरती

महाकाल मंदिर परिसर में स्थित अन्य मंदिर : महाकालेश्वर मंमिदर परिसर में और भी ऐसे मंदिर तथा देव प्रतिमाएं हैं, जो श्रद्धालुओं की आस्था का केन्द्र हैं। इनमें लक्ष्मी-नृसिंह मंदिर, ऋद्धि-सिद्धि गणेश, विट्ठल पंढरीनाथ मंदिर, श्रीराम दरबार मंदिर, अवंतिका देवी, चंद्रादित्येश्वर, मंगलनाथ, अन्नपूर्णादेवी, वाच्छायन गण्पति, औंकारेश्वर महादेव, नागचंद्रेश्वर महादेव (वर्ष में एक बार नागपंचमी के दिन ही मंदिर के पट खुलते हैं), नागचंद्रेश्वर प्रतिमा, सिद्धि विनायक मंदिर, साक्षी गोपाल, संकटमोचन सिद्धदास हनुमान मंदिर, स्वप्नेश्वर महादेव, बृह्स्पतिश्वर महादेव, त्रिविष्टपेश्वर महादेव, मां भद्रकाली मंदिर, नवग्रह मंदिर, मारुतिनंदन हनुमान, कोटितीर्थ कुंड, श्रीराम मंदिर, नीलकंठेश्वर महादेव, गोविंदेश्वर महादेव, सूर्यमुखी हनुमान, लक्ष्मीप्रदाता मोढ़ गणेश मंदिर, स्वर्णजालेश्वर महादेव, शनि मंदिर, कोटेश्वर महादेव, अनादिकल्पेश्वर महादेव, चंद्र-आदित्येश्वर महादेव, वृद्धकालेश्वर महादेव, सप्तऋषि मंदिर, श्री बालविजय मस्त हनुमान आदि प्रमुख हैं।


भारत में स्मारकों की कमाई से मिलते हैं करोड़ों, UP है कमाई में नंबर 1

गुड न्यूज : फिक्स पगारदारनी तरफेंण मा कोर्ट चुकादो आपशे तेवी सरकारने भीति


SECONDARY TEACHERS NI TALIM NO SAMAY BAPOR NO RAKHATA UGRA VIRODH


Friday, 15 April 2016

ગુજારે જે શિરે તારે



ગુજારે જે   શિરે  તારે  જગતનો નાથ તે સ્હેજે
ગણ્યું જે પ્યારું પ્યારાએ અતિ પ્યારું ગણી લેજે

દુનિયાની  જૂઠી વાણી વિષે  જો  દુ:ખ વાસે છે
જરાયે  અંતરે  આનંદ  ના  ઓછો  થવા  દેજે

કચેરી  માંહી  કાજીનો   નથી  હિસાબ  કોડીનો
જગતકાજી  બનીને  તું  વહોરી  ના પીડા લેજે

જગતના  કાચના  યંત્રે  ખરી વસ્તુ નહિ  ભાસે
ન  સારા  કે  નઠારાની  જરાયે   સંગતે  રહેજે

રહેજે   શાંતિ  સંતોષે   સદાયે   નિર્મળે   ચિત્તે
દિલે જે  દુ:ખ  કે  આનંદ  કોઈને  નહિ  કહેજે

વસે  છે  ક્રોધ  વૈરી  ચિત્તમાં  તેને  તજી  દેજે
ઘડી  જાયે  ભલાઈની  મહાલ્રક્ષ્મી  ગણી  લેજે

રહે ઉન્મત્ત સ્વાનંદે  ખરું એ  સુખ  માની  લેજે
પીએ તો શ્રી પ્રભુના પ્રેમનો  પ્યાલો ભરી  લેજે

કટુ  વાણી  જો  તું  સુણે  વાણી મીઠી તું કહેજે
પરાઈ   મૂર્ખતા  કાજે   મુખે  ના ઝેર તું  લેજે

અરે  પ્રારબ્ધ  તો  ઘેલું  રહે  છે  દૂર માંગે તો
ન  માંગે  દોડતું આવે  ન  વિશ્વાસે  કદી રહેજે

અહો શું પ્રેમમાં રાચે? નહિ ત્યાં સત્ય તું પામે!
અરે  તું  બેવફાઈથી   ચડે   નિંદા  તણે  નેજે

લહે છે  સત્ય  જે સંસાર  તેનાથી  પરો  રહેજે
અરે એ  કીમિયાની જે મઝા છે  તે પછી કહેજે

વફાઈ તો નથી  આખી  દુનિયામાં  જરા દીઠી
વફાદારી  બતાવા  ત્યાં નહિ  કોઈ  પળે જાજે

રહી  નિર્મોહી  શાંતિથી રહે  એ સુખ મોટું  છે
જગત બાજીગરીના તું બધા છલબલ જવા દેજે

પ્રભુના  નામના  પુષ્પો  પરોવી કાવ્યમાળા તું
પ્રભુની પ્યારી  ગ્રીવામાં  પહેરાવી  પ્રીતે  દેજે

કવિરાજા  થયો  શી છે  પછી પીડા તને  કાંઈ
નિજાનંદે હમ્મેશાં  ‘બાલ’ મસ્તીમાં મઝા લેજે
-બાલાશંકર કંથારિયા


ગ્રામ્ય માતા


(શાર્દૂલવિક્રીડિત)
ઊગે  છે  સુરખીભરી  રવિ  મૃદુ  હેમન્તનો  પૂર્વમાં
ભૂરું છે નભ સ્વચ્છ સ્વચ્છ દીસતી એકે નથી વાદળી
ઠંડો  હિમભર્યો  વહે  અનિલ  શો, ઉત્સાહને  પ્રેરતો
જે ઉત્સાહ ભરી દીસે શુક ઊડી ગાતાં, મીઠા ગીતડાં

(માલિની)
મધુર સમય  તેવે  ખેતરે  શેલડીના
રમત કૃષિવલોનાં બાલ નાનાં કરે છે
કમલવત ગણીને બાલના ગાલ રાતા
રવિ નિજ કર તેની  ઉપરે ફેરવે  છે

(અનુષ્ટુપ)
વૃદ્ધ માતા અને તાત તાપે છે સગડી કરી
અહો  કેવું સુખી જોડું કર્તાએ નિરમ્યું દીસે

(વસંતતિલકા)
ત્યાં  ધૂળ દૂર  નજરે  ઊડતી  પડે  છે
ને  અશ્વ  ઉપર  ચડી  નર  કોઈ આવે
ટોળે  વળી  મુખ  વિકાસી ઊભા રહીને
તે  અશ્વને  કુતૂહલે  સહુ  બાલ  જોતાં

(મંદાક્રાન્તા)
ધીમે  ઊઠી  શિથિલ કરને નેત્રની પાસ રાખી
વૃદ્ધા  માતા નયન નબળાં  ફેરવીને  જૂએ છે
ને તેનો એ પ્રિય પતિ હજુ શાન્ત બેસી રહીને
જોતાં ગાતો સગડી પરનો  દેવતા  ફેરવે  છે

(અનુષ્ટુપ)
ત્યાં તો આવી પહોંચ્યો એ અશ્વ સાથે યુવાન ત્યાં
કૃષિક, એ ઊઠી ત્યારે ‘આવો બાપુ !’ કહી ઊભો

(શાર્દૂલવિક્રીડિત)
‘લાગી છે મુજને તૃષા, જલ જરી દે તું મને’ બોલીને
અશ્વેથી ઊતરી યુવાન ઊભીને  ચારે  દિશાએ જૂએ
‘મીઠો છે રસ ભાઈ ! શેલડી તણો’ એવું દયાથી કહી
માતા ચાલી યુવાનને લઈ ગઈ જ્યાં છે ઊભી શેલડી

(વસંતતિલકા)
પ્યાલું ઉપાડી ઊભી  શેલડી પાસ માતા
છૂરી  વતી  જરીક  કાતળી એક  કાપી
ત્યાં સેર છૂટી  રસની ભરી  પાત્ર  દેવા
ને કૈંક વિચાર કરતો નર  તે ગયો  પી

(અનુષ્ટુપ)
‘બીજું પ્યાલું ભરી દેને, હજુ છે મુજને તૃષા’
કહીને  પાત્ર  યુવાને  માતાના  કરમાં  ધર્યું

(મંદાક્રાન્તા)
કાપી  કાપી  ફરી  ફરી  અરે !  કાતળી  શેલડીની
એકે  બિન્દુ  પણ  રસતણું  કેમ હાવાં  પડે  ના ?
‘શું કોપ્યો છે પ્રભુ મુજ પરે !’ આંખમાં આંસુ લાવી
બોલી માતા  વળી  ફરી  છૂરી   ભોંકતી  શેલડીમાં

(અનુષ્ટુપ)
‘રસહીન ધરા થઈ  છે, દયાહીન થયો  નૃપ
નહિ તો ના બને આવું’ બોલી માતા ફરી રડી

(વસંતતિલકા)
એવું   યુવાન  સુણતાં  ચમકી  ગયો  ને
માતાતણે  પગ  પડી  ઊઠીને   કહે  છે:
એ હું જ છું નૃપ, મને કર માફ ! બાઈ !
એ હું જ છું નૃપ, મને કર માફ ! ઈશ !

(શાર્દૂલવિક્રીડિત)
પીતો'તો રસ મિષ્ટ હું પ્રભુ! અરે ત્યારે જ ધાર્યું  હતું
આ લોકો સહુ દ્રવ્યવાન નકી છે, એવી ધરા છે  અહીં
છે  તો  યે મુજ ભાગ  કૈં નહીંસમો, તે હું વધારું  હવે
શા માટે બહુ દ્રવ્ય આ ધનિકની, પાસેથી લેવું નહીં ?

(ઉપજાતિ)
રસ  હવે  દે ભરી પાત્ર  બાઈ !
પ્રભુ  કૃપાએ  નકી   એ  ભરાશે
સુખી રહે બાઈ ! સુખી રહો સૌ,
તમારી તો આશિષ માત્ર માગું !

(વસંતતિલકા)
પ્યાલું  ઉપાડી ઊભી  શેલડી પાસ માતા
છૂરી વતી  જરી  જ  કાતળી  એક કાપી
ત્યાં  સેર  છૂટી  રસની  ભરી પાત્ર દેવા
બહોળો વહે રસ અહો છલકાવી પ્યાલું !
-કલાપી