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Saturday, 22 November 2014

बादामी के चालुक्‍य

6ठवीं और 8ठवीं इसवी के दौरान दक्षिण भारत में चालुक्‍य बड़े शक्तिशाली थे। इस साम्राज्‍य का प्रथम शास‍क पुलकेसन, 540 इसवी मे शासनारूढ़ हुआ और कई शानदार विजय हासिल कर उसने शक्तिशाली साम्राज्‍य की स्‍थापना किया। उसके पुत्रों कीर्तिवर्मन व मंगलेसा ने कोंकण के मौर्यन सहित अपने पड़ोसियों के साथ कई युद्ध करके सफलताएं अर्जित की व अपने राज्‍य का और विस्‍तार किया।

कीर्तिवर्मन का पुत्र पुलकेसन द्वितीय, चालुक्‍य साम्राज्‍य के महान शासकों में से एक था, उसने लगभग 34 वर्षों तक राज्‍य किया। अपने लम्‍बे शासनकाल में उसने महाराष्‍ट्र में अपनी स्थिति सुदृढ़ की व दक्षिण के बड़े भूभाग को जीत लिया, उसकी सबसे बड़ी उपलब्धि हर्षवर्धन के विरूद्ध रक्षात्‍मक युद्ध लड़ना थी।

तथापि 642 इसवी में पल्‍लव राजा ने पुलकेसन को परास्‍त कर मार डाला। उसका पुत्र विक्रमादित्‍य, जो कि अपने पिता के समान महान शासक था, गद्दी पर बैठा। उसने दक्षिण के अपने शत्रुओं के विरूद्ध पुन: संघर्ष प्रारंभ किया। उसने चालुक्‍यों के पुराने वैभव को काफी हद तक पुन: प्राप्‍त किया। यहां तक कि उसका परपोता विक्रमादित्‍य द्वितीय भी महान योद्धा था। 753 इसवी में विक्रमादित्‍य व उसके पुत्र का दंती दुर्गा नाम के एक सरदार ने तख्‍ता पलट दिया। उसने महाराष्‍ट्र व कर्नाटक में एक और महान साम्राज्‍य की स्‍थापना की जो राष्‍ट्र कूट कहलाया।

कांची के पल्‍लव

छठवीं सदी की अंतिम चौथाई में पल्‍लव राजा सिंहविष्‍णु शक्तिशाली हुआ तथा कृष्‍णा व कावेरी नदियों के बीच के क्षेत्र को जीत लिया। उसका पुत्र व उत्‍तराधिकारी महेन्‍द्रवर्मन प्रतिभाशाली व्‍यक्ति था, जो दुर्भाग्‍य से चालुक्‍य राजा पुलकेसन द्वितीय के हाथों परास्‍त होकर अपने राज्‍य के उत्‍तरी भाग को खो बैठा। परन्‍तु उसके पुत्र नरसिंह वर्मन प्रथम ने चालुक्‍य शक्ति का दमन किया। पल्‍लव राज्‍य नरसिंह वर्मन द्वितीय के शासनकाल में अपने चरमोत्‍कर्ष पर पहुंचा। वह अपनी स्‍थापत्‍य कला की उपलब्धियों के लिए प्रसिद्ध था, उसने बहुत से मन्दिरों का निर्माण करवाया तथा उसके समय में कला व साहित्‍य फला-फूला। संस्‍कृत का महान विद्वान दानदिन उस के राजदरबार में था। तथापि उसकी मृत्‍यु के बाद पल्‍लव साम्राज्‍य की अवनति होती गई। समय के साथ-साथ यह मात्र स्‍थानीय कबीले की शक्ति के रूप में रह गया। आखिरकार चोल राजा ने 9वीं इसवी. के समापन के आस-पास पल्‍लव राजा अपराजित को परास्‍त कर उसका साम्राज्‍य हथिया लिया।

भारत के प्राचीन इतिहास ने, कई साम्राज्‍यों, जिन्‍होंने अपनी ऐसी बपौती पीछे छोड़ी है, जो भारत के स्‍वर्णिम इतिहास में अभी भी गूंज रही है, का उत्‍थान व पतन देखा है। 9वीं इसवी. के समाप्‍त होते-होते भारत का मध्‍यकालीन इतिहास पाला, सेना, प्रतिहार और राष्‍ट्र कूट आदि - आदि उत्‍थान से प्रारंभ होता है।

Sunday, 2 November 2014

नेट बैंकिंग में हाईटेक अपराधियों से कैसे बचें

इंटरनेट बैंकिंग से खाताधारक की सुविधाओं में तो इजाफा हुआ है लेकिन इसमें जरा सी अज्ञानता या चूक होने पर खाताधारक को भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है। इसलिए इंटरनेट बैंकिंग करते समय कुछ खास बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है

कमाल अहमद रूमी कुछ साल पहले तक बैंक खाताधारक को बैंकिंग से जुड़े छोटे-छोटे कामों के लिए भी बैंक के चक्कर लगाने पड़ते थे। पासबुक इंट्री कराना हो या बैंक कर्ज के बारे में पूछताछ करना हो, पैसे निकालना हो या पैसे जमा करना हो, हर काम बैंक की शाखा में जाकर ही होता था लेकिन अब इंटरनेट बैंकिंग के जरिए यह सबकुछ बेहद आसान हो गया है। अपने खाते की जानकारी लेना हो या कर्ज की प्रक्रिया या ब्याज दर की जानकारी हासिल करना हो सब काम घर बैठे हो जाता है यहां तक कि खाते से रकम निकालने या जमा करने की सुविधा भी बैंक आपको घर बैठे दे रहे हैं। इसके लिए आपको बस अपने इंटरनेट अकाउंट को लाग इन करना होगा और अपनी रिक्वेस्ट डालनी होगी। इंटरनेट बैंकिंग का चलन पिछले कुछ वर्षो में काफी तेजी से बढ़ा है। यह सुविधाजनक तो है ही साथ ही इसमें जोखिम भी काफी है। इंटरनेट बैंकिंग के बारे में अगर आपको पूरी जानकारी नहीं है या खाता लाग इन करने में जरा सी लापरवाही बरती तो आपको भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसलिए जरूरी है कि इंटरनेट बैंकिंग सुविधा का इस्तेमाल करते समय कुछ खास बातों का ध्यान अवश्य रखें। पब्लिक कंप्यूटर से न करें लॉग इन इंटरनेट बैंकिंग सुविधा का इस्तेमाल करते समय कुछ खास बातों का ध्यान अवश्य रखें। इनमें सबसे ज्यादा ध्यान इस बात पर दें कि आप जब भी इस सुविधा का इस्तेमाल करें तो किसी पब्लिक कंप्यूटर जैसे साइबर कैफे, लाइब्रेरी, आफिस इत्यादि का कंप्यूटर न इस्तेमाल करें। अगर आप इन कंप्यूटर का इस्तेमाल कर रहे हैं तो आप इस बात का अवश्य ध्यान रखें कि ब्राउजर पर कभी भी आई या पार्सवड रिमेम्बर करने की अनुमति न दें। इसके अलावा लाग इन करने के बाद अपना इंटरनेट सत्र बीच में छोड़कर इधर उधर बातचीत में न लग जाएं। इसके अलावा अपने कंप्यूटर या लैपटॉप को अनजाने लोगों को काम करने के लिए न दें। साथ ही ट्रांजेक्शन के बाद कंप्यूटर से ब्राउजिंग हिस्ट्री को डिलीट कर दें और टेम्प्रेरी फाइलें भी हटा दें। ट्रांजेक्शन पूरा होने के बाद विंडो को सीधे बंद न करें बल्कि लाग आउट करके ही कंप्यूटर बंद करें। समय-समय पर बदलें पार्सवड इंटरनेट बैंकिंग से जुड़ी लाग इन आईडी या पार्सवड को समय-समय पर बदलते रहना चाहिए। पार्सवड ऐसा होना चाहिए जिसमें गिनती, अक्षर व विशेष शब्द जैसे अंडर स्कोर या ऐट द रेट आफ इत्यादि अवश्य रखें। पार्सवड को कभी कहीं लिखकर न रखें बल्कि अपने दिमाग में बिठा लें। पार्सवड में फोन नंबर, मकान नंबर, मां-बाप या बच्चों के नाम का इस्तेमाल न करें क्योंकि अगर कोई आपका पार्सवड चोरी करने की कोशिश करेगा तो पहले इन नामों या नंबरों को डालकर देखेगा। हाल ही में एडोब के करोड़ों अकाउंट हैक हो गए जिसकी वजह यह थी कि उसका पार्सवड 123456 था इसलिए कभी इस तरह के आसान पार्सवड का इस्तेमाल कतई न करें। खाते की सूचना फोन पर किसी को न दें अगर कभी कोई भी व्यक्ति आपसे यह कहे कि मैं आपके बैंक से बोल रहा हूं और आपका लाग इन आईडी या पार्सवड करप्ट हो गया है या चोरी हो गया है इसलिए आप नया आईडी बनाकर बैंक को बताएं तो सजग हो जाएं। क्योंकि आपका बैंक आपसे कोई भी सूचना कभी फोन पर नहीं मांगता। इसके अलावा वन टाइप पार्सवड या कस्टमर आईडी भी किसी को न बताएं। खाते पर रखें नजर आनलाइन बैंकिंग ट्रांजेक्शन करने के बाद अपने खाते पर नजर रखें। जो मोबाइल नंबर आपने बैंक में रजिस्र्टड करा रखा है या ट्रांजेक्शन के समय जिस नंबर पर आपका वन टाइम पार्सवड आता है अगर वह ट्रांजेक्शन के समय अचानक निष्क्रिय हो गया है तो इसकी सूचना तुरंत अपने बैंक को दें और सभी भुगतान रोकने को कहें। साथ ही बैंक से मिले हर एसएमएस को चेक करें। क्योंकि बैंक समय-समय पर एसएमएस के जरिए अपने ग्राहकों को जरूरी सूचनाएं या अलर्ट देते हैं। मेल में दिए लिंक का न करें इस्तेमाल इंटरनेट बैंकिंग लाग इन करने के लिए हमेशा नए ब्राउजर में बैंक का वेब एड्रेस टाइप करें। किसी सर्च इंजन या ई मेल में दिए लिंक से सीधे लाग इन करने से बचें। हैकर अक्सर सर्च इंजन या आपके मेल बाक्स में ऐसे लिंक डाल देते हैं जो देखने में बिल्कुल बैंक की वेबसाइट जैसा ही दिखता है अगर आप इस पर क्लिक करते हैं तो आपकी जरूरी जानकारी हैकर तक पहुंच जाती है और वह आपका बैंक खाता हैक कर सकता है।

એટીએમ

એટીએમનો મહિનામાં પાંચથી વધુ વખત પૈસા નિકળવા અથવા કોઇ અન્ય ઉદ્દેશ્યથી તેનો ઉપયોગ કરવાથી આજથી ચાર્જ લાગશે. એટીએમમાંથી પાંચથી વધુ વખત લેણદેણ બાદ પ્રત્યેક વખત 20 રૂપિયાનો ચાર્જ લગાવવામાં આવશે.

તેમાં બેલેંસની જાણકારી માટે કરવામાં આવતા ઉપયોગનો પણ સમાવેશ થશે. રિઝર્વ બેંકના નવા દિશાનિર્દેશોના અનુસાર આ ચાર્જ લાગૂ કરવામાં આવી રહ્યો છે. આ નિર્દેશોના અનુસાર જે બેંકોમાં ગ્રાહકોના બચત કે કરન્ટ એકાઉન્ટ છે, તેમના એટીએમ દ્વારા મહિનામાં પાંચ વખત જ નિ:શુલ્ક જ લેણદેણ કરી શકાશે.

છ મહાનગરો દિલ્હી, મુંબઇ, ચેન્નઇ, કલકત્તા, હૈદરાબાદ તથા બેંગ્લોરમાં એટીએમમાંથી પૈસા કાઢવા અથવા બિન નાણાકીય વ્યવહારો મિની સ્ટેટમેંટ કાઢવાની સુવિધા હવે મહિનામાં ફક્ત પાંચ વખત મળશે. ત્યારબાદ એટીએમના ઉપયોગ પર પ્રત્યેક વખતે 20 રૂપિયાનો ચાર્જ લાગશે.

આ ઉપરાંત જે બેંકોમાં ગ્રાહકોના ખાતા નથી, તેમના એટીએમનો ઉપયોગ પણ મહિનામાં નિ:શુલ્ક ફક્ત ત્રણ વખત કરી શકાશે. અત્યાર સુધી આ સુવિધા મહિના પાંચ વખત મળતી હતી.

રિઝર્વ બેંકે આ વર્ષ ઓગષ્ટમાં જાહેર કરેલા જાહેરનામામાં કહ્યું હતું ''એટીએમના ઉંચા દર, બેંક શાખાઓ તથા ગ્રાહકોની પાસે હાલના ચૂકવણીના વૈકલ્પિક સ્ત્રોતોને ધ્યાનમાં રાખતાં અન્ય બેંકોના એટીએમમાંથી માસિક નિ:શુલ્ક લેણદેણની સીમા પાંચથી ઘટાડીને ત્રણ કરવામાં આવી રહી છે. તેમાં નાણાકીય અને બિન નાણાકીય બંને પ્રકારોને લેણદેણ સામેલ હશે.''