એસ.બી.ઠાકોરના બ્લોગમાં આપનું સ્વાગત છે.

Sunday, 2 November 2014

नेट बैंकिंग में हाईटेक अपराधियों से कैसे बचें

इंटरनेट बैंकिंग से खाताधारक की सुविधाओं में तो इजाफा हुआ है लेकिन इसमें जरा सी अज्ञानता या चूक होने पर खाताधारक को भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है। इसलिए इंटरनेट बैंकिंग करते समय कुछ खास बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है

कमाल अहमद रूमी कुछ साल पहले तक बैंक खाताधारक को बैंकिंग से जुड़े छोटे-छोटे कामों के लिए भी बैंक के चक्कर लगाने पड़ते थे। पासबुक इंट्री कराना हो या बैंक कर्ज के बारे में पूछताछ करना हो, पैसे निकालना हो या पैसे जमा करना हो, हर काम बैंक की शाखा में जाकर ही होता था लेकिन अब इंटरनेट बैंकिंग के जरिए यह सबकुछ बेहद आसान हो गया है। अपने खाते की जानकारी लेना हो या कर्ज की प्रक्रिया या ब्याज दर की जानकारी हासिल करना हो सब काम घर बैठे हो जाता है यहां तक कि खाते से रकम निकालने या जमा करने की सुविधा भी बैंक आपको घर बैठे दे रहे हैं। इसके लिए आपको बस अपने इंटरनेट अकाउंट को लाग इन करना होगा और अपनी रिक्वेस्ट डालनी होगी। इंटरनेट बैंकिंग का चलन पिछले कुछ वर्षो में काफी तेजी से बढ़ा है। यह सुविधाजनक तो है ही साथ ही इसमें जोखिम भी काफी है। इंटरनेट बैंकिंग के बारे में अगर आपको पूरी जानकारी नहीं है या खाता लाग इन करने में जरा सी लापरवाही बरती तो आपको भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसलिए जरूरी है कि इंटरनेट बैंकिंग सुविधा का इस्तेमाल करते समय कुछ खास बातों का ध्यान अवश्य रखें। पब्लिक कंप्यूटर से न करें लॉग इन इंटरनेट बैंकिंग सुविधा का इस्तेमाल करते समय कुछ खास बातों का ध्यान अवश्य रखें। इनमें सबसे ज्यादा ध्यान इस बात पर दें कि आप जब भी इस सुविधा का इस्तेमाल करें तो किसी पब्लिक कंप्यूटर जैसे साइबर कैफे, लाइब्रेरी, आफिस इत्यादि का कंप्यूटर न इस्तेमाल करें। अगर आप इन कंप्यूटर का इस्तेमाल कर रहे हैं तो आप इस बात का अवश्य ध्यान रखें कि ब्राउजर पर कभी भी आई या पार्सवड रिमेम्बर करने की अनुमति न दें। इसके अलावा लाग इन करने के बाद अपना इंटरनेट सत्र बीच में छोड़कर इधर उधर बातचीत में न लग जाएं। इसके अलावा अपने कंप्यूटर या लैपटॉप को अनजाने लोगों को काम करने के लिए न दें। साथ ही ट्रांजेक्शन के बाद कंप्यूटर से ब्राउजिंग हिस्ट्री को डिलीट कर दें और टेम्प्रेरी फाइलें भी हटा दें। ट्रांजेक्शन पूरा होने के बाद विंडो को सीधे बंद न करें बल्कि लाग आउट करके ही कंप्यूटर बंद करें। समय-समय पर बदलें पार्सवड इंटरनेट बैंकिंग से जुड़ी लाग इन आईडी या पार्सवड को समय-समय पर बदलते रहना चाहिए। पार्सवड ऐसा होना चाहिए जिसमें गिनती, अक्षर व विशेष शब्द जैसे अंडर स्कोर या ऐट द रेट आफ इत्यादि अवश्य रखें। पार्सवड को कभी कहीं लिखकर न रखें बल्कि अपने दिमाग में बिठा लें। पार्सवड में फोन नंबर, मकान नंबर, मां-बाप या बच्चों के नाम का इस्तेमाल न करें क्योंकि अगर कोई आपका पार्सवड चोरी करने की कोशिश करेगा तो पहले इन नामों या नंबरों को डालकर देखेगा। हाल ही में एडोब के करोड़ों अकाउंट हैक हो गए जिसकी वजह यह थी कि उसका पार्सवड 123456 था इसलिए कभी इस तरह के आसान पार्सवड का इस्तेमाल कतई न करें। खाते की सूचना फोन पर किसी को न दें अगर कभी कोई भी व्यक्ति आपसे यह कहे कि मैं आपके बैंक से बोल रहा हूं और आपका लाग इन आईडी या पार्सवड करप्ट हो गया है या चोरी हो गया है इसलिए आप नया आईडी बनाकर बैंक को बताएं तो सजग हो जाएं। क्योंकि आपका बैंक आपसे कोई भी सूचना कभी फोन पर नहीं मांगता। इसके अलावा वन टाइप पार्सवड या कस्टमर आईडी भी किसी को न बताएं। खाते पर रखें नजर आनलाइन बैंकिंग ट्रांजेक्शन करने के बाद अपने खाते पर नजर रखें। जो मोबाइल नंबर आपने बैंक में रजिस्र्टड करा रखा है या ट्रांजेक्शन के समय जिस नंबर पर आपका वन टाइम पार्सवड आता है अगर वह ट्रांजेक्शन के समय अचानक निष्क्रिय हो गया है तो इसकी सूचना तुरंत अपने बैंक को दें और सभी भुगतान रोकने को कहें। साथ ही बैंक से मिले हर एसएमएस को चेक करें। क्योंकि बैंक समय-समय पर एसएमएस के जरिए अपने ग्राहकों को जरूरी सूचनाएं या अलर्ट देते हैं। मेल में दिए लिंक का न करें इस्तेमाल इंटरनेट बैंकिंग लाग इन करने के लिए हमेशा नए ब्राउजर में बैंक का वेब एड्रेस टाइप करें। किसी सर्च इंजन या ई मेल में दिए लिंक से सीधे लाग इन करने से बचें। हैकर अक्सर सर्च इंजन या आपके मेल बाक्स में ऐसे लिंक डाल देते हैं जो देखने में बिल्कुल बैंक की वेबसाइट जैसा ही दिखता है अगर आप इस पर क्लिक करते हैं तो आपकी जरूरी जानकारी हैकर तक पहुंच जाती है और वह आपका बैंक खाता हैक कर सकता है।

No comments:

Post a Comment