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Tuesday, 12 April 2016

कहीं आप भी तो पेट्रोल पंप पर नहीं हो रहे ऐसे धोखों का शिकार...





पेट्रोल पंप पर कम पेट्रोल डाले जाने जैसी खबरें अक्‍सर आपने सुनी होंगी। कई बार आप भी इसका शिकार हुए होंगे। इसके बावजूद इसकी हकीकत आज भी आपकी समझ से परे ही रह गई होगी। कारण साफ है कि जब मीटर एकदम सही चलता है, तो फिर पेट्रोल या डीजल कम कैसे डाला जा सकता है। इसी सच्‍चाई से पर्दा उठाएंगे आज यहां...।



कर्मचारी के हाथों की हरकत पर दें ध्‍यान
पेट्रोल को भरवाते समय कर्मचारी के हाथों की हरकत पर ध्‍यान दीजिए। देखिए कि कहीं वह बार-बार नोजल के स्‍विच को ऑन करने के बाद उसे दोबारा तो नहीं दबाता। आपको भी वह कर्मचारी अगर ऐसा करता दिख जाता है तो मान लीजिए कि सौ प्रतिशत कुछ न कुछ गड़बड़ है। इसका कारण ये है कि जिस नोजल से कर्मी पेट्रोल डालते हैं, उसका सीधा संबंध मीटर से होता है। ऐसे में अगर 200 रुपये का पेट्रोल फीड किया गया है तो एक बार नोजल के स्‍विच को दबाने पर खुद ब खुद 200 रुपये का पेट्रोल डल जाएगा। उसको बीच में बंद करने की कोई जरूरत ही नहीं पड़ेगी। वह स्‍विच सिर्फ मीटर को ऑन करने के लिए होता है। मीटर पर फीड वैल्‍यू के पूरा होते ही वह खुद ब खुद रुक जाता है।




नोजल से छेड़छाड़ बताता है ये
ऐसे में अगर बीच में नोजल के स्‍विच को छेड़ा जाए या बंद किया जाए तो मीटर तो चलता रहता है, लेकिन नोजल को बंद करने की वजह से पेट्रोल बीच में रुक जाता है। वह बाहर नहीं निकलता। ऐसे में कर्मचारी बीच-बीच में कई बार नोजल का स्‍विच बंद करते हैं, जिससे मीटर तो दौड़ता रहता है लेकिन पेट्रोल की रफ्तार बीच-बीच में रुकती रहती है।




उदाहरण से समझिए इसको
अब इसको अगर आप उदाहरण से समझना चाहें तो मानिए कि आपने 200 रुपये का पेट्रोल डलवाया है। 200 रुपये का पेट्रोल गाड़ी में डलने में 30 से 45 सेकेंड का समय लगता है। इस समय आपका पूरा ध्‍यान मीटर की रीडिंग पर गौर करने में निकल जाता है। इस बीच अगर कर्मचारी 10 सेकेंड के लिए भी नोजल को बंद करता है तो समझ लीजिए कि आपको 50 रुपये के पेट्रोल का घाटा हो गया है।




चिप का भी कर सकते हैं इस्‍तेमाल
आपको चपत लगाने का एक तरीका एक खास तरीके की चिप भी हो सकती है। पेट्रोल पंप मशीन के अंदर एक खास तरीके की चिप को फिट किया जाता है। इस चिप को रिमोट से नियंत्रित किया जाता है। सेल्‍समैन इसको बटन से भी नियंत्रित कर सकता है। ऐसे में पेट्रोल या डीजल को गाड़ी में डालते वक्‍त बटन दबाने से तेल गिरने की रफ्तार कम हो जाती है। ऐसे में मीटर तो चलता रहता है, लेकिन गाड़ी में पेट्रोल उसकी अपेक्षा कम जाता है। बड़ी बात तो ये है कि इसको कोई पकड़ भी नहीं सकता। कारण ये है कि जैसे ही कोई इसको चेक करने लगेगा, रिमोट इसको सही कर देगा और तेल सही क्‍वांटिटी में आ जाएगा।


 

राउंड फिगर अमाउंट में लें डीजल या पेट्रोल
एक बात का अहतियात जरूर बरतें कि कभी भी राउंड फिगर अमाउंट में पेट्रोल या डीजल न लें। हमेशा ऊपर या नीचे का अमाउंट चुनें। उदाहरण के तौर पर कभी 100, 200 या 500 रुपये का फ्यूल न लें। 102, 206 या 508 रुपये का पेट्रोल डलवाएं। ऐसा इसलिए क्‍योंकि पेट्रोल पंप वाले मशीनों से छेडछाड़ करके उनको तेज कर देते हैं। ऐसा करने से मीटर जंप करने लगता है। कुल मिलाकर मीटर तेज भागता है और पेट्रोल कम मिलता है।




पैसे वापस लेने में न करें जल्‍दबाजी
सुबह-सुबह जो भी पेट्रोल पंप पर पेट्रोल या डीजल लेने जाता है, उनमें अधिकतर नौकरीपेशा लोग होते हैं। इनको ऑफिस पहुंचने की जल्‍दी होती है। ऐसे में वह 200 या 300 रुपये का पेट्रोल डालने को कहते हैं और कर्मचारी को 1000 रुपये का नोट थमा देते हैं। अब कर्मचारी इसका फायदा उठाकर ग्राहक को 800 या 700 रुपये नहीं, बल्‍कि 600 या 400 रुपये वापस करता है। अब ऑफिस पहुंचने की हड़बड़ी में ग्राहक के लिए नोट को गिनना मुश्‍किल होता है। ऐसे में अब अगर ग्राहक की चोरी पकड़ में आ जाती है जो वह हैरानी जताते हुए जल्‍दबाजी का बहाना बनाकर मासूम मुस्‍कान के साथ उसको बाकी रुपये वापस कर देता है।




पेट्रोल पंप पर ध्‍यान रखें इन बातों का
पेट्रोल लेने से पहले मीटर पर शून्‍य रीडिंग के लिए पूरी तरह से आश्‍वस्‍त हो जाएं। आपको अगर मिलावट का संदेह हो तो फिल्‍टर पेपर परीक्षण की मांग करें। इसके अलावा आखिर में कैश मेमो जरूर ले लें। सेवा से संतुष्‍ट न होने पर शिकायत करना भी कभी न भूलें। साथ ही कंपनी के प्रमाणिक पेट्रोल पंप से ही पेट्रोल या डीजल लें।


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