गुड़गांव के तिकोना पार्क में स्थित गुरु द्रोणाचार्य की मूर्ति।
गुड़गांव. महान गुरु भक्त एकलव्य का हरियाणा के गुड़गांव से गहरा संबंध है। ऐसा कहा जाता है कि इस स्थान पर ही गुरु द्रोणाचार्य ने एकलव्य से उसका अंगूठा मांगा था, ताकि धनुर्विद्या में वह अर्जुन का मुकाबला ही नहीं कर सके। हरियाणा सरकार ने गुड़गांव का नाम बदलने का फैसला किया है। अब एक बार फिर यह अपने पुराने नाम 'गुरुग्राम' के नाम से जाना जाएगा। कितना बदल गया गुरु द्रोणाचार्य का गांव...
- आज गुड़गांव को एक ऐसे शहर के रूप में पहचाना जाता है जो मॉडर्न स्टाइल से तैयार की गईं बिल्डिंग्स से घिरा हुआ है।
- पिछले 3 दशक में यहां करीब 400 बड़ी और मझोली इंडस्ट्रियल यूनिट्स ने कदम रखे हैं।
- भले ही आज इसकी पहचान हाईटेक सिटी के रूप में होती है, लेकिन इसकी पहचान कुछ और ही है, जिसके बारे में शायद कम ही लोग जानते हैं।
- महाभारत में पांडव और कौरवों को धर्म की सीख देने वाले गुरु द्रोणाचार्य का गांव, गुरुग्राम यहीं है।
- गुड़गांव वहीं जगह है जहां अर्जुन ने चिड़िया की आंख में निशाना लगाया था।
- कुरूक्षेत्र में होने वाले महाभारत के युद्ध की तैयारी भी इसी स्थान पर हुई थी।
- पुराने गुड़गांव के रहने वाले लोग बताते हैं कि बाहर से आने वाले लोगों को यहां के इतिहास से कोई लेना-देना नहीं है और लोकल लोग इसे भुला चुके हैं।
गुरु द्रोणाचार्य को अपना अंगूठा दान करते एकलव्य।
एकलव्य की होती है पूजा
- महान गुरु भक्त एकलव्य का इस स्थान से गहरा संबंध है।
- गुरुग्राम में ही एकलव्य ने अपना अंगूठा काट कर गुरु दक्षिणा दी थी।
- आज भी मध्य प्रदेश और दक्षिणी राजस्थान से भील जाति के लोग यहां स्थित एकलव्य के मंदिर में पूजा करने आते हैं।
- गुड़गांव की भूमि ने मुस्लिम राजाओं द्वारा किए गए आक्रमणों को भी झेला है।
- पृथ्वीराज चौहान और मुस्लिम शासक मोहम्मद गौरी के बीच होने वाला तराई का युद्ध भी गुड़गांव के पास ही हुआ था।
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